पूजा व सेवा
ऑनलाइन केवल स्थान सुरक्षित होता है। दक्षिणा मंदिर के काउंटर पर ही दी जाती है, इस वेबसाइट पर कोई भुगतान नहीं लिया जाता।
- सुबह 6:30 पट खुलते हैं
- सुबह 8:00 प्रातः आरती
- रात 8:30 संध्या आरती
- रात 9:30 पट बंद होते हैं
मदिरा भोग
यही वह अर्पण है जिसके लिए मंदिर प्रसिद्ध है। श्रद्धालु मदिरा पुजारी को सौंपते हैं, पुजारी उसे तश्तरी में डालकर मंत्रों के साथ भगवान के मुख से लगाते हैं और शेष प्रसाद के रूप में लौटा देते हैं। यह ऐच्छिक है और केवल पुजारी के माध्यम से ही होता है।
इस पूजा के बारे में पूछेंनित्य भोग एवं आरती
पुजारी दिनभर भगवान की नित्य पूजा करते हैं। मंदिर के पुजारियों के अनुसार दिन में पाँच बार पूजन के बाद भोग लगाया जाता है और सुबह तथा शाम को आरती होती है।
इस पूजा के बारे में पूछेंपुष्प, नारियल एवं प्रसाद अर्पण
सामान्य पूजन टोकरी में गेंदे के फूल, नारियल और अगरबत्ती होती है। श्रद्धालु लड्डू भी चढ़ाते हैं और शराबबंदी के बाद से कई भक्त चना, चिरौंजी और नारियल का प्रसाद लेकर आते हैं।
इस पूजा के बारे में पूछेंदीपमालिका पर दीपदान
आँगन में खड़े पत्थर के दीपस्तंभ पर तेल के दीप जलाए जाते हैं। परंपरा से श्रद्धालु बाधाओं के निवारण और कुशल-मंगल की कामना के साथ यहाँ दीप प्रज्वलित करते हैं।
इस पूजा के बारे में पूछेंभैरव अष्टमी पर जन्म आरती एवं छप्पन भोग
भैरव अष्टमी की मध्यरात्रि को शंखध्वनि के साथ विशेष जन्म आरती होती है और भगवान को परंपरागत भोग के साथ छप्पन प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं।
इस पूजा के बारे में पूछेंपगड़ी श्रृंगार एवं सवारी पूजन
सवारी के दोनों दिनों पर भगवान के रजत मुखारविंद को सिंधिया परिवार की ओर से आई पगड़ी धारण कराई जाती है और पालकी निकलने से पहले कलेक्टर तथा पुलिस अधीक्षक उसका पूजन करते हैं।
इस पूजा के बारे में पूछें